Tuesday, 19 May 2015

मुकेश अंबानी ने बताया अपना सक्सेस मंत्र, ये 10 बातें आ सकती है आपके काम


नई दिल्ली. यदि आप पैसा कमाने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे हैं तो आपको नए सिरे से सोचना होगा। आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग फेल हो रही है, तो आपको किसी इंस्टीट्यूशन में जानें की नहीं, बल्कि कुछ खास टिप्स की जरूरत है। ऐसे में देश के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी ने अपना सक्सेस मंत्र शेयर किया है। इन्हें अपनाकर आप भी सफल कारोबारी बन सकते हैं। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस राज से पर्दा उठाया कि अमीर व्यक्ति की स्ट्रैटेजी कैसी होती है।
हम आपको बता रहे हैं उन टिप्स के बारे में जो आपको भी सफल बिजनेसमैन बनने और पैसा कमाने में मददगार होंगे।
1. सबकुछ पैसा ही नहीं, लेकिन जरूरी है
देश की बड़ी कंपनियों में शुमार मुकेश अंबानी की कंपनी भी शून्य से शुरू होकर शिखर तक पहुंची। इसके पीछे उनके पिता धीरूभाई अंबानी की सोच थी। उन्होंने अपनी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया। अपने पिता से मिले हुनर को बखूबी मुकेश भी अपना रहे हैं। धीरूभाई एक टीचर की तरह थे और मुकेश उनके लड़के की तरह नहीं बल्कि हमेंशा स्टूडेंट के रूप में बिजनेस के गुण सीखते रहे।
रिलायंस की हर मीटिंग में मुकेश उन्हें बहुत ध्यान से सुना करते थे। ये उनके ही शब्द थे कि पैसा सब कुछ नहीं होता, लेकिन यह जरूरी भी है। उसके पीछे नहीं भागना चाहिए। मुकेश ने इन्हीं रास्तों पर चलते हुए बिजनेस एम्पायर खड़ा किया।
2. सपने देखें
मुकेश अंबानी मानते हैं कि पैसे के पीछे भागना गलत है। लेकिन यदि सपने देखें जाएं और उन्हें पूरा करने की कोशिश की जाए तो पैसा बुरी चीज नहीं है। जीवन में अपना मुकाम पाना सबसे अहम है। महज सपने संजोने से कुछ नहीं होता है, उसे पूरा करने के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करनी होती है और उस पर काम करने से आगे का रास्ता खुद-ब-खुद दिख जाता है।

3. अच्छा काम बना देगा हीरो
मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी देशभर में छाई हुई है। इसके बावजूद वह खुद मीडिया में दिखाई देने को तरजीह नहीं देते। मुकेश का मानना है कि जब आपका काम बोलता है तब बाकी चीजें अपने आप शांत हो जाती हैं और आप पब्लिक हीरो बन जाते हैं। जब कंपनी के विकास के आंकड़े मजबूत रहते हैं तो बाजार में उसे किसी और सहारे की जरूरत नहीं पड़ती।
4. दिल की मानें
जिस तरह मुकेश ने अपना बहुमंजिला घर एंटीलिया का निर्माण कराया या फिर टी-20 क्रिकेट टीम में निवेश किया, उससे रिलायंस पर सामंती व्यवस्था होने के आरोप लगे। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि इन मामलों में वही किया जो उनके दिल ने कहा और फैसले लेने का यही सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने दिल की मानें, वो जो कहता है सही कहता है। फिर चाहे बात कहीं निवेश की हो या फिर अपने व्यापार को बढ़ाने की।

5. भरोसा सब पर करें, किसी पर निर्भर न रहें
मुकेश अंबानी जानते हैं कि खुद से सीखने से अच्छा कोई विकल्प नहीं। शुरुआती दौर में कई कठिनाइयां झेल चुके मुकेश अंबानी अपने काम की हर बारीकियों को बेहतर से समझते हैं। वह कंपनी के आला अधिकारियों पर भरोसा तो पूरा रखते हैं, लेकिन हर तरह की इमरजेंसी का सामना करने के लिए खुद को तैयार रखते हैं। उनका मानना है कि जो भी इंसान अपने शुरुआती दौर में होता है, उसे खुद से सीखने की जरूरत होती है। यही करना भी चाहिए।
6. सीखने का सबसे अच्छा तरीका रिस्क लेना
कहते हैं जो रिस्क नहीं लेता, वह आगे नहीं बढ़ता। यही वजह है कि मुकेश अंबानी ने बिजनेस खड़ा करने में तमाम रिस्क लिए। उन्होंने गोल तय किए और उस दिशा में सकारात्मक काम करना शुरू किया। वह मानते हैं की हर कदम सही नहीं होता, लेकिन जो लोग रिस्क लेने के बाद उनसे सीखते हुए आगे बढ़ते हैं उन्हें मंजिल मिल ही जाती है। रिस्क लेकर फेल होना, उन लोगों से काफी बेहतर होता है जो सिर्फ सोचकर डर जाते हैं।

7. काम की भूख बनाए रखें और उस पर अटल रहें
कामयाबी उनके लिए कतई नहीं है, जो रेस लगाते वक्त आधे रास्ते में रुक जाते हैं। आपको अपनी ऊर्जा हमेशा बनाई रखनी चाहिए। किसी भी कॉम्पिटीशन में आधे-अधूरे पर रुक जाना सही नहीं। बाजार किसी का इंतजार नहीं करता। हां, ये जरूर है कि जब चीजें आपके मुताबिक हों तो आप थोड़ा रिलैक्स हो लें।
8. बढ़ाया टीम का हौसला
प्रगति की पहली सीढ़ी है सीखना। कुछ भी सीखने के लिए भूखे रहिए। कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि सीखने के लिए देर हो गई है। हर क्षण कंपनी के फायदे के लिए खर्च करना चाहिए। अपने प्रोफेशनल्स पर यकीन रखिए। अपनी टीम की हौसला अफजाई करनी चाहिए।

9. हमेशा सतर्क रहिए
अगर आप अपने वातावरण को समझ रहे हैं, तो यह आपको फायदा देगा। ग्राहक हमेशा प्रतिस्पर्धा के बीच बेहतर डील के साथ खरीदारी करता है। यदि आप एक बेहतरीन उत्पाद का निर्माण करते हैं और वह मार्केट में पहले से मौजूद है तो आपको स्किल डेवलप करने की जरूरत है। प्रोडक्ट को बेहतर बनाएं।
10. विश्वसनीयता देगी बड़ा प्रीमियम
समझिए, इनोवेट करिए और फ्यूचर को तैयार करिए। आपकी टीम के लिए और प्रतिस्पर्धा के लिए यह जरूरी है। अगर आप शांत अपनी कुर्सी पर बैठ जाएंगे तो आप सबसे बड़े लूजर बनेंगे। आपने कैश को इनफ्लो और आउटफ्लो करने में विश्वसनीयता की सख्त जरूरत होती है।

Monday, 18 May 2015

एनजीओ सेक्टर सेवा के साथ रोजगार भी


एनजीओ के माध्यम से जहां एक ओर समाज सेवा को बल मिलता है, वहीं बदलते वक्त के साथ यह रोजगार का भी बेहतर जरिया बन चुका है। एनजीओ, यानी गैरसरकारी संगठन (Non Government Organization) स्वयंसेवकों (Volunteers) का ऐसा समूह है, जो स्थानीय, राष्ट्रीय के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बखूबी काम करता है। यह लोगों की कठिनाइयां दूर करते हुए समाज का विकास करता है। संसाधनों और सामाजिक जरूरतों के बीच की खाई को दूर करने में भी यह सरकार की मदद करता है। आम तौर पर एनजीओ महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समस्या, शिक्षा, प्रदूषण, ग्रामीण व शहरी विकास, मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर काम करता है। यह सरकार की नीतियों को आम लोगों तक पहुंचाता भी है। चूंकि जनसंख्या के लिहाज से अपना देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, इसलिए यहां काफी संख्या में एनजीओ काम करते हैं। स्वाभाविक रूप से इससे काम के मौके भी अधिक मिलते हैं।

योग्यता (Eligibility for NGO): हालांकि समाज सेवा करने के लिए किसी योग्यता की जरूरत नहीं होती, पर समाज कल्याण में मास्टर डिग्री (एमएसडब्ल्यू) या समाज विज्ञान, ग्रामीण प्रबंधन जैसे विषयों में पीजी एनजीओ में अच्छी नौकरी प्राप्त करने में मदद करती है। अगर कोर्स की बात करें, तो बैचलर इन सोशल वर्क (बीएसडब्ल्यू), बीए इन सोशल वेलफेयर, मास्टर इन सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) या एमए इन सोशल वेलफेयर करना फायदेमंद है। अच्छे अवसर प्राप्त करने के लिए एमफिल या पीएचडी जैसी डिग्री भी मददगार है।
काम की रणनीति (Work Planning for NGO):हमारे देश में कई एनजीओ हैं, जो अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इसलिए इस फिल्ड में उतरने से पहले रणनीति बनानी जरूरी है। किसी भी एनजीओ से जुड़ने से पहले यह तय कर लें कि आप किस जगह काम करना चाहते हैं। उस जगह की भौगोलिक सीमाएं और लोगों के रहन-सहन के बारे में जानकारी जरूरी है। एनजीओ में अपनी भूमिका की भी जानकारी पहले ही तय कर लें। बाल विकास, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य आदि जिस मुद्दे पर आप काम करना चाहते हैं, उस विषय का अध्ययन जरूर कर लें। हालांकि कोई व्यक्ति स्वयं भी एनजीओ शुरू कर सकता है, बशर्ते उसके पास नेतृत्व क्षमता हो और काम करने वाले लोगों की अच्छी टीम हो।
आमदनी (Income Sources of NGO):इस क्षेत्र में सैलरी योग्यता, अनुभव और जॉब प्रोफाइल पर मिलती है। शुरुआत में अमूमन आठ से दस हजार रुपये प्रतिमाह मिल जाते हैं, पर जब आप किसी बड़े एनजीओ से जुड़ते हैं, तो वेतन का दायरा काफी बढ़ जाता है। यूनीसेफ जैसे इंटरनेशनल एनजीओ में तो काफी पैसे मिलते हैं। अगर आप खुद का एनजीओ चला रहे हैं, तो काम के अनुरूप पैसा मिल जाता है।
प्रमुख संस्था (Where we can Do Professional Course for NGO)
इंडियन इंस्टीटूट ऑफ सोशल वेलफेयर ऐंड बिजनेस मैनेजमेंट, कोलकाता
  • www.iiswbm.edu»
  • टाटा इंस्टीटूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई,
  • www.tiss.edu
  • दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
  • www.du.ac.in
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली,
  • www.jmi.nic.in
  • डॉ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा,
  • www.dbrau.ac.in
  • लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
  • www.lkouniv.ac.in

कैसे करें कैरियर प्लानिंग (Career Planning) ताकि आसानी से मिले मंजिल


आज के प्रतियोगी माहौल में सफलता के लिए उचित कैरियर प्लानिंग के बगैर बात बन ही नहीं सकती। वैसे तो बचपन से ही यह चर्चा होने लगती है कि बड़े होकर क्या बनना है, पर वास्तविक कैरियर प्लानिंग हाई स्कूल में आने के बाद ही शुरू होती है। इसी समय इस पर मनन-चिंतन आरंभ हो जाता है कि कैरियर संबंधी रुचि क्या है, कौन-सी फील्ड कैरियर की दृष्टि से बेहतर है और उस फील्ड में जॉब के मौके कितने हैं। उहारण के लिए, यदि कोई बैंकर बनना चाहता है तो वह सीए या एमबीए-फाइनेंस में जाता है अथवा एमकॉम. जैसी डिग्री हासिल करता है। यह सब एक योजना के तहत होता है, अनायास नहीं। और इसी से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। कैरियर प्लानिंग से लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है, जिससे कदम स्वाभाविक रूप से उस ओर बढ़ने लगते हैं। इसके लिए छात्र इन स्टेप्स का ध्यान रखें :
स्व-आकलन (Self Analysis) : कैरियर प्लानिंग के लिए खुद का आकलन अत्यंत ही जरूरी है। अपनी रुचि, अपनी क्षमता और अपनी प्रतिभा को ध्यान में रखकर की गई कैरियर प्लानिंग ही सही कही जा सकती है।
लक्ष्य का निर्धारण(Define Your Goal): अपनी शैक्षणिक योग्यता, जीवन में प्राथमिकता अथवा काम में अपने अनुभव के आधार पर आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें। जब उद्देश्य स्पष्ट होगा, तभी आप रास्ते भी तलाशते चले जाएंगे।
आत्मविकास (Self Development) : लक्ष्य निर्धारण के बाद खुद को उसके योग्य बनाना होगा। ऐसे में पहले यह निर्धारित करें कि मंजिल तक पहुंचने के लिए किस तरह की शैक्षणिक योग्यता और कैसी स्किल्स की जरूरत है और फिर उसके अनुरूप खुद को विकसित करें।
एक्शन(Action): योजना के अनुसार कार्य करना सबसे जरूरी है। यह विचार करें कि आज से कुछ महीने बाद, एक साल बाद या दो साल बाद या पांच साल बाद आप खुद को कहां देखना चाहते हैं। फिर उसके अनुसार रुटीन बनाकर काम करें।
अवसरों पर नजर(Focus on Opportunities): जब किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपने खुद को तैयार कर लिया तो उससे संबंधित अवसरों पर नजर रखना भी जरूरी है।
रिलैक्स रहना (Keep Relax): कैरियर प्लानिंग में तनाव को कोई जगह न दें, अन्यथा इसका विपरीत असर आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। पढ़ाई, काम, आराम व मनोरंजन में तालमेल जरूरी है।

कैसे बने एक सफल बिजनिसमैंन


अगर आप अपना बिजनेस शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो कामयाबी की बुलंदियों पर राज करने के लिए आप में कुछ खास गुण होने चाहिए। क्योंकि बिजनेस करना हंसी का खेल नहीं है। इसमें सफलता का शिखर है, तो फेल्योर का खतरा भी है। जरा सी नजर चूकी नहीं कि बिजनेस घाटे का सौदा बन जाता है। बिजनेस महाभारत की मछली की आंख की तरह है, जिसमें फोकस हमेशा लक्ष्य (मुनाफा) पर होना चाहिए। लक्ष्य पर फोकस रहें

बिजनेस बहुत ही डेडिकैटेड काम है। इसलिए पहले आप खुद से सवाल करें कि क्या आप बिजनेस के लिए फिट हैं? यह आपसे पूर्ण समय मांगेगा, तो क्या आप पूर्ण समय देने के लिए तैयार हैं? यह आपके धैर्य की परीक्षा लेगा, तो क्या आप में असीम धैर्य है? क्योंकि कोई भी बिजनेस शुरू कर लेने का मतलब यह नहीं होता है कि आप पहले दिन से ही पैसा कमाने लग जाएंगे। आप कौन हैं, आपका व्यवहार कैसा है, आपके प्रोडक्ट या सर्विस क्या हैं, यह जानने-समझने में ग्राहकों को वक्त लगता है। इसलिए अपने बिजनेस के पहले चरण में बिक्री से पहले ग्राहकों का भरोसा जीतने का प्रयत्न करें। अगर कोई ग्राहक पहली बार आपसे से पूछताछ करता है और खरीदारी नहीं करता है, तो झुंझलाएं नहीं,विनम्रता से उसके प्रश्नों का उत्तर दें।

इस तरह के छोटे-छोटे काम आपके बिजनेस की सफलता की बुनियाद होते हैं।

हमेशा क्रिएटिव बने रहें (Always Be Creative):  बिजनेस में क्रिएटिविटी की बहुत अहमियत होती है। शुरू भी क्रिएटीविटी के साथ करें, ताकि लोगों को लगे कि इसमें नया है। जब बिजनेस स्थापित हो जाए, तब भी क्रिएटिव बने रहें। प्रतिद्वंद्वी या अन्य क्षेत्र के बिजनेसमैन के पास यदि कुछ नया क्रिएटिव आइडिया है और वह आपके बिजनेस को शूट करता है तो उसे अपनाने में भी नहीं हिचकें।
क्वालिटी से समझौता नहीं करें (Don’t Compromise with Quality): आप कोई भी बिजनेस करें, चाहे मैन्युफैक्चरिंग या ट्रेडिंग या सर्विस, उसकी क्वॉलिटी से भूलकर भी समझौता न करें। आपकी क्वालिटी ही आपको मार्केट में टिकाए रखेगी। अगर आपसे आपके कस्टमर संतुष्ट हैं, तो आप बिजनेस में कभी असफल नहीं होंगे।

प्रतिद्वंद्वी पर हमेशा नजर रखें (Always See the Competitive): बिजनेस में अगर कॉम्पीटिशन नहीं हो मजा नहीं आता है। देखिये कि आपके प्रतिद्वंद्वी की बिजनेस की नीति क्या है, उसके प्रोडक्ट यदि आपसे बेहतर है, किस कारण बेहतर है, उसकी सर्विस आपसे अच्छी है तो क्यों है? इन सारी चीजों का आकलन करें और फिर अपनी रणनीति बनाएं। इसके उलट यदि आप अपने प्रतिद्वंद्वियों से बीस हैं, तो भी यह देखें कि आप और बेहतर क्या कर सकते हैं। कॉम्पीटिटरों से भी सीखें। अगले कदम पर हमेशा नजर रखें।

रिस्क को कैलकुलेट करें (Risk Calculation):  बिजनेस में आपको रिस्क तो लेना होगा, लेकिन यह रिस्क कैलकुलेटेड होना चाहिए। रिस्क लेते वक्त खुद से पूछें कि बुरा हुआ तो अधिकतम कितना होगा। अगर इस बुरे को झेल पाने की क्षमता आपमें है तो ऐसे रिस्क लेने चाहिए। किसी भी इनोवेशन को अपनाने पर उसके पॉजीटिव और निगेटिव दोनों ही तरह के परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए।

हल पर नजर, समस्या पर नहीं (Keep Eyes on Solution no Problem): दुनिया ऐसे लोगों से भरी पड़ी है, जो हर काम में समस्या ढूंढ़ सकते हैं। लेकिन अगर आप काम शुरू करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो समस्याओं का हल ढूंढ़ें। हमेशा समाधान की ओर देखें। आपमें समस्याओं का तेज स्पीड से समाधान करने की क्षमता का होना जरूरी है।

जिम्मेदारी लें, क्रेडिट नहीं (Be Responsible not Credit): किसी काम के खराब होने पर उसकी जिम्मेदारी खुद न लेना और अच्छा काम दूसरों ने किया तो उसका क्रेडिट भी लेने की कोशिश करना अच्छे बिजनेसमैन के गुण नहीं हैं। अगर किसी का एटिट्यूड ऐसा है तो हो सकता है कि नौकरी में आपका काम काम चल जाए, लेकिन बिजनेस में नाकामी ही मिलेगी। यहां कामयाब वही होते हैं, जो जिम्मेदारी लेते हैं।

टीमवर्क में भरोसा रखें (Keep faith Teamwork): जिन लोगों को लगता है कि वे अकेले ही सभी काम कर सकते हैं, वे बिजनेस में कभी आगे नहीं बढ़ सकते। अपनी कमियों और कमजोरियों को पहचानना और उनके लिए टीम की मदद लेना एक सफल इंसान के गुण हैं। अगर आपको लगता है कि आप टीम के रूप में काम नहीं कर सकते तो यह फील्ड आपके लिए नहीं है। टीम बनाएं, उस पर भरोसा रखें, उसे प्रेरित करते रहें और खुद में टीम लीडर का गुण विकसित करें। टीमवर्क से ही बड़ी कामयाबी मिलती है।

काम एंज्वाय करें, बोझ न समझें (Enjoy Your work: बिजनेस हमेशा पसंद का करें। अगर किसी ऐसे काम को करने की सोच रहे हैं, जो आपकी रुचि का नहीं है, तो भले ही उसमें कितना भी दम हो, वह काम नहीं करेगा।

काम ऐसा हो, जिसे आप एंज्वाय कर सकें और जिसे करने की क्षमता हो। दूसरों की देखादेखी बिजनेस नहीं करें। अपने काम से हमेशा प्रेम करें। अपने काम पर भरोसा रखें। काम को कभी भी बोझ की तरह नहीं लें।

गलती से सीखें, दोहराएं नहीं (Don’t Repeat Mistakes): अपने बिजनेस के दौरान कोई भी गलती हो जाए, तो उससे सीखें। मंथन करें कि गलती क्यों हुई, कहां चूक हुई। आगे गलती नहीं हो, उसके लिए रणनीति बनाएं, संकल्प लें।

मार्केटिंग हमेशा करते रहिये (Continue Run Marketing): किसी भी बिजनेस की सफलता उसकी मार्केटिंग रणनीति है। अगर मार्केटिंग अच्छी नहीं, तो कितना भी अच्छा प्रोडक्ट हो, कितनी अच्छी सर्विस हो, आप कामयाब बिजनेसमैन नहीं बन सकते। बिजनेस एक उड़ता हुआ जहाज की तरह है। जैसे जहाज ईंधन के बिना कुछ नहीं, वैसे ही मार्केटिंग के बिना बिजनेस कुछ नहीं। कभी भी मार्केटिंग में ढील नहीं दें।

Sunday, 17 May 2015

योर मनी: वित्त वर्ष 16 में बचत का मंत्र


वित्त वर्ष 2016 यानी नए फाइनेंशियल इयर का आगाज हो गया है। जरूरी है कि अभी से आप अपनी इन्वेस्टमेंट और टैक्स प्लानिंग की शुरुआत कर दें। क्योंकि मंजिल वही लोग पाते हैं जो रास्ते के लिए तैयार रहते हैं। यानी फाइनेंशियल गोल हासिल करने के लिए अभी से होमवर्क जरूरी है। ये भी याद रखिए कि सिर्फ निवेश कर देने से ही बात नहीं बनती, समय-समय पर पोर्टफोलियो का रियलिटी चेक लेना भी जरूरी होता है। ताकी बदलते दौर के साथ पोर्टफोलियो भी बदलता रहे और फाइनेंशियल हेल्थ में भी सुधार आता रहे। इसी मकसद के साथ हम कर रहे है खास चर्चा जहां आपकी मदद करेंगे फाइनेंशियल प्लानर गौरव मशरूवाला और ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मठपाल।

इन जानकारों का कहना है कि अपने वित्तीय लक्ष्यों को पाने के लिए बचत करें। आपकी बचत ऐसी होनी चाहिए जिसमें आपको टैक्स छूट का  फायदा मिले। अगर आप पीपीएफ में निवेश करने की सोच रहे हैं तो हर महीने पैसे डालें। आप समय-समय पर अपने मौजूदा निवेश की समीक्षा करते रहें और जरूरत होने पर उसमें बदलाव करें। आपको समय-समय पर अपनी देनदारियों का भी जायजा लेते रहना चाहिए। ये पता करते रहें कि क्या आपको पहले से भुगतान करना चाहिए। अगर ब्याज दरों में बदलाव हुआ हो तो पता करें कि देनदार ने आपकी ब्याज दर कम की है या नहीं।

इन जानकारों का कहना है कि नए वित्त वर्ष की फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय सबसे पहले अपने घर का बजट तैयार करें। नए बजट के बाद कई चीजें महंगी हुई हो हैं, जिनका असर आपके बजट पर पड़ेगा। सर्विस टैक्स जल्द ही बढ़ जाएगा। सर्विस टैक्स बढ़ने से सर्विसेज महंगी हो जाएंगी, जिसका असर सीधा आपकी जेब और बजट पर पड़ेगा।

इन जानकारों के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 के लिए अभी से टैक्स प्लानिंग करें। सेक्शन 80 सी के तहत 1.50 लाख रुपये की छूट का फायदा लें। एनपीएस में 50000 रुपये के निवेश पर अतिरिक्त छूट का फायदा जरूर लें। सेक्शन 80 सीसीडी(1बी) के तहत मिलने वाली छूट सेक्शन 80 सी से अलग होती। आप परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर के लिए भी अप्लाई कर दें।

इन जानकारों का कहना है कि कंपनी में जल्द ही निवेश की जानकारी मांगी जाएगी। जिसको ध्यान में रखते हुए पूरे साल के लिए अभी से प्लानिंग कर कंपनी को जानकारी दें। वित्त वर्ष 2015-16 में ईएलएसएस में जरूर निवेश करें।

इन जानकारों का मानना है कि सुकन्या समृद्धि स्कीम निवेश का अच्छा विकल्प है। ये एश्योर्ड रिटर्न के लिए अच्छी स्कीम है। इसमें वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 9.2 फीसदी ब्याज के साथ सेक्शन 80 सी के तहत छूट भी है। साथ ही इसका रिटर्न भी टैक्स फ्री है।

इन जानकारों ने बताया कि सेक्शन 80 डी के तहत मिलने वाली छूट बढ़ा दी गई है। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर अब 25000 रुपये की छूट मिलेगी। वरिष्ठ नागरिकों के हेल्थ प्रीमियम पर 30000 रुपये की छूट दी गई है। इस स्थिति में यूनिट लिंक्ड हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से बचकर गंभीर बीमारी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बेहतर विकल्प होगा।

इन जानकारों की राय है कि नए वित्त वर्ष की प्लानिंग करते समय अपने बैंक विवरण अपडेट करें और पते में बदलाव की जानकारी दें, नामांकन की जानकारी पूरी करें और केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करें। अपने पैसे की उपलब्धता और खर्च का अनुमान तैयार करे, एफडी/बॉन्ड मैच्योर होने पर मिलने वाले पैसे का हिसाब रखें, इंश्योरेंस प्रीमियम, स्कूल फीस जैसे अन्य खर्चों का लेखा-जोखा तैयार करें, छुट्टियों, जन्मदिन, त्यौहार पर होने वाले खर्च को भी जोड़ें, अपने बड़े वित्तीय लक्ष्य को भी लिखकर रखें और हिसाब लगाएं कि खर्चों के लिए पैसे कहां से आएंगे।

जानकारों का कहना है कि नए वित्त वर्ष की प्लानिंग करते समय पूरे साल के लिए निवेश की प्लानिंग करें और प्रीमियम पेमेंट सालभर के लिए बांट लें, प्रीमियम या बिल का भुगतान आखिरी समय के लिए नहीं छोड़ें। अगर वित्त वर्ष के आखिर में कुछ पेमेंट रहता है तो पैसे की प्लानिंग जरूरी है। पहले से पैसे की प्लानिंग करने से आखिरी समय में परेशानी नहीं होगी। इसलिए जिस महीने जो भी पेमेंट देना है, उसके लिए पैसे की प्लानिंग करके रखें।